कहने को मोहब्बत है लेकिन, अब ऐसी मोहब्बत क्या करनी,
जो नींद चुरा ले आँखों से,
जो ख्वाब दिखा कर फूलो के, ताबीर में कांटें दे जाये
जो गम की काली रातों से हर आश का जुगनू ले जाये,
जो ख्वाब सजाती आँखों को आंसू ही आंसू दे जाये,
जो मुश्किल करदे जीने को, जो मरने को आसाँ करे
वो दिल जो प्यार का मंदर हो, वो यादों को मेहमान करे,
अब ऐशी मोहब्बत क्या करनी
जो उम्र की नगदी ले जाये और फिर भी झोली खाली हो
वो सूरत दिल का रोग बने जो सूरत देखी भाली हो
जो कैश बना दे इन्सां को , जो राँझा ओर फरहाद करे
अब ऐशी मोहब्बत क्या करनी जो खुशियों को बर्बाद करे
देखो तो मोहब्बत के मारे, हर सक्श यही कहता है
सोचो तो मोहब्बत के अन्दर, एक दर्द हमेशा रहता है
फिर भी जो चीज़ मोहब्बत है कब इन बातों से डरती है
कब इनके बांदे रुकती है, जिस दिल में इसे बसना हो ये चुपके से बस जाती है
एक बार मोहब्बत हो जाये
फिर चाहे जीना मुश्किल हो, या झोली खाली रह जाये
या आँखें आंसू बन जाये, या राँझा ओर फरहाद करे,
फिर इसकी हुकूमत होती है , आबाद करे बर्बाद करे,
एक बार मोहब्बत हो जाये, कब इन बातो से डरती है
कब इनके बांदे रूकती है,
जो चीज़ मोहब्बत है 'राही', जब होनी हो; हो जाती है
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