Wednesday, January 23, 2013

ये लफ्ज़ आईने हैं मत इन्हें उछाल के चल

अदब की राह मिली है तो देखभाल के चल

कहे जो तुझसे उसे सुन, अमल भी कर उस पर

ग़ज़ल की बात है उसको ऐसे टाल के चल

सभी के काम में आएंगे वक्त पड़ने पर

तू अपने सारे तजुर्बे ग़ज़ल में ढाल के चल

मिली है ज़िन्दगी तुझको इसी ही मकसद से

संभाल खुद को भी औरों को भी संभाल के चल

कि उसके दर पे बिना मांगे सब ही मिलता है

चला है रब कि तरफ तो बिना सवाल के चल

अगर ये पांव में होते तो चल भी सकता था

ये शूल दिल में चुभे हैं इन्हें निकाल के चल

तुझे भी चाह उजाले कि है, मुझे भी 'कुंअर'

बुझे चिराग कहीं हों तो उनको बाल के चल

--- कुँअर बेचैन



Monday, February 20, 2012

अगर हम अपने दिल को अपना इक चाकर बना लेते
तो अपनी ज़िदंगी को और भी बेहतर बना लेते

ये काग़ज़ पर बनी चिड़िया भले ही उड़ नहीं पाती
मगर तुम कुछ तो उसके बाज़ुओं में पर बना लेते

अलग रहते हुए भी सबसे इतना दूर क्यों होते
अगर दिल में उठी दीवार में हम दर बना लेते

हमारा दिल जो नाज़ुक फूल था सबने मसल डाला
ज़माना कह रहा है दिल को हम पत्थर बना लेते

हम इतनी करके मेहनत शहर में फुटपाथ पर सोये
ये मेहनत गाँव में करते तो अपना घर बना लेते

'कुँअर' कुछ लोग हैं जो अपने धड़ पर सर नहीं रखते
अगर झुकना नहीं होता तो वो भी सर बना लेते

--------- कुँअर बेचैन

Monday, November 7, 2011

जो बीत गई सो बात गई

जो बीत गई सो बात गई
जीवन में एक तारा था
माना वह बेहद प्यारा था
वह डूब गया तो डूब गया
अम्बर के आंगन को देखो
कितने इसके तारे टूटे
कितने इसके प्यारे छूटे
जो छुट गए फिर कहा मिले
पर बोलो टूटे तारो पर
कब अम्बर शोक मनाता है
जो बीत गई सो बात गई |

तुम्हारी पलकों का कँपना

तुम्हारी पलकों का कँपना ।
तनिक-सा चमक खुलना, फिर झँपना ।
तुम्हारी पलकों का कँपना ।

मानो दीखा तुम्हें किसी कली के
खिलने का सपना ।
तुम्हारी पलकों का कँपना ।

सपने की एक किरण मुझको दो ना,
है मेरा इष्ट तुम्हारे उस सपने का कण होना,
और सब समय पराया है
बस उतना क्षण अपना ।

तुम्हारी
पलकों का कँपना ।

लोग तो कुछ भी कहते हैं....

सबसे दिल का हाल न कहना, लोग तो कुछ भी कहते हैं
जो कुछ गुजरे खुद पर सहना, लोग तो कुछ भी कहते हैं

हो सकता है इससे दिल का बोझ जरा कम हो जाये
अश्रु-ए-गम बहा भी लेना, लोग तो कुछ भी कहते हैं

इस जीवन की राह कठिन है, पाँव में छाले पड़ते हैं
मगर हमेशा सफ़र में रहना, लोग तो कुछ भी कहते हैं

नए रंग में ढली है दुनिया, प्यार पे लेकिन पहरे हैं
ख्वाब सुहाने बुनते रहना, लोग तो कुछ भी कहते हैं

सोच-समझकर प्यार से हमने तेरी शोख अदाओं को
नाम दिया फूलों का गहना, लोग तो कुछ भी कहते हैं

आँखों में है अक्स तुम्हारा, हमने सबसे कह डाला
तुम भी अपने दिल की कहना, लोग तो कुछ भी कहते हैं ..!!

उधार का यह प्रेम

पर एक बात चाहूँगा मैं
तुमसे पूछना
क्या तुम दोगी उधार में
अपना प्रेम
मैं लौटा दूँगा उसे एक दिन
पूरे ब्याज सहित
बहुत दरकार है मुझे उसकी
फ़िलहाल

मैं ख़ुद को
अपनी आत्मा को
अपनी त्वचा को
गिरवी रखता हूँ
तुम्हारे पास
पाने के लिए
थोड़ा-सा
तुमसे
तुम्हारा उधार का यह प्रेम !
जिसे मैं लौटा दूँगा बिना शर्त
अविलम्ब
एक दिन....।

तुझे भुलाना भी मुश्किल है............!!

मोहब्बत का इरादा अब बदल जाना भी मुश्किल है;
तुझे खोना भी मुश्किल है, तुझे पाना भी मुश्किल है;
जरा सी बात पर आंखें भिगो के बैठ जाते हो;
तुझे अब अपने दिल का हाल बताना भी मुश्किल है;
उदासी तेरे चहरे पे गवारा भी नहीं लेकिन;
तेरी खातिर सितारे तोड़ कर लाना भी मुश्किल है;
यहाँ लोगों ने खुद पे परदे इतने डाल रखे हैं;
किस के दिल में क्या है नज़र आना भी मुश्किल है,
तुझे ज़िन्दगी भर याद रखने की कसम तो नहीं ली;
पर एक पल के लिए तुझे भुलाना भी मुश्किल है............!!