कश्ती
का
तेरी
जो
कोई
भाग
टूटे,
खुद को तोड़ मैं उसे जोड़ दूंगा
अपनी किस्मत के सारे फूल तोड़
तेरी किस्मत में जोड़ दूंगा
गर्त आये जो तो खुद को बिछा कर
तुम्हारे लिए मै
पुल भी बनूँगा,,
मुझको माफ़ करना
दोस्त,
मै बस इतना
ही कर सकूँगा!!
लोगो की उंगली
जो तुझ पे
उठेगी,
वहां दोष मै
अपने सर में
मढूंगा,
दुखे जब दर्द
से तेरा सीना,
वही दर्द मै
अपने दिल में
सहूँगा,
न पीछे दिखे
जब न आगे
की सूझे,
वहां मै दिया
बन तेरे लिए
जलूँगा
मुझको माफ़ करना
दोस्त,
मै बस इतना
ही कर सकूँगा!!
--- मनीष
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