Wednesday, January 23, 2013

वो जिसके हाथ


वो जिसके हाथ में छाले हैं पैरों में बिवाई है
उसी के दम से रौनक आपके बंगले में आई है

इधर एक दिन की आमदनी का औसत है चवन्नी का
उधर लाखों में गांधी जी के चेलों की कमाई है

कोई भी सिरफिरा धमका के जब चाहे जिना कर ले
हमारा मुल्क इस माने में बुधुआ की लुगाई है

रोटी कितनी महँगी है ये वो औरत बताएगी
जिसने जिस्म गिरवी रख के ये क़ीमत चुकाई है

--- अदम गोंडवी

काजू भुने पलेट में


काजू भुने पलेट में, विस्की गिलास में
उतरा है रामराज विधायक निवास में

पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत
इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में

आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह
जो गए फुटपाथ पर घर की तलाश में

पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें
संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में

जनता के पास एक ही चारा है बगावत
यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में

--- अदम गोंडवी

कश्ती का तेरी जो कोई भाग


कश्ती का तेरी जो कोई भाग टूटे,
खुद को तोड़ मैं उसे जोड़ दूंगा
अपनी किस्मत के सारे फूल तोड़
तेरी किस्मत में जोड़ दूंगा
गर्त आये जो तो खुद को बिछा कर
तुम्हारे लिए मै पुल भी बनूँगा,,
मुझको माफ़ करना दोस्त,
मै बस इतना ही कर सकूँगा!!
लोगो की उंगली जो तुझ पे उठेगी,
वहां दोष मै अपने सर में मढूंगा,
दुखे जब दर्द से तेरा सीना,
वही दर्द मै अपने दिल में सहूँगा,
पीछे दिखे जब आगे की सूझे,
वहां मै दिया बन तेरे लिए जलूँगा
मुझको माफ़ करना दोस्त,
मै बस इतना ही कर सकूँगा!!
--- मनीष

मौत तो आनी है ...


मौत तो आनी है तो फिर मौत का क्यों डर रखूँ

जिंदगी , तेरे क़दमों पर मैं अपना सर रखूँ

जिसमें माँ और बाप की सेवा का शुभ संकल्प हो

चाहता हूँ मैं भी काँधे पर वही काँवर रखूँ

हाँ, मुझे उड़ना है लेकिन इसका मतलब यह नहीं

अपने सच्चे बाज़ुओं में इसके-उसके पर रखूँ

आज कैसे इम्तहाँ में उसने डाला है है मुझे

हुक्म यह देकर कि अपना धड़ रखूँ या सर रखूँ

कौन जाने कब बुलावा आए और जाना पड़े

सोचता हूँ हर घड़ी तैयार अब बिस्तर रखूँ

ऐसा कहना हो गया है मेरी आदत में शुमार

काम वो तो कर लिया है काम ये भी कर रख रखूँ

खेल भी चलता रहे और बात भी होती रहे

तुम सवालों को रखो मैं सामने उत्तर रखूँ

--- कुँअर बेचैन